Monday, 11 August 2014

My Hindi Poem: ये शहर

My Hindi Poem: ये शहर: ये शहर भीड़ में एक सपना कहीं खो गया है ये शहर,लगता है अकेला हो गया है गुब्बारों से लोग सुबह होते ही उम्मीद भर उड़ने लगते है शाम क...

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