रात और दिन
शांतता के दिए में
फड़फड़ा के जी रहा है
घनी रात का...डर
उजालों की नोक पर
तप तप के उधार की सांसें...बटोर,
आनेवाले कल की चिंता से....लहू लुहान,
रात के घाव...सी रहा है
सवेरे,
इस खेल से उठते धुंवे को हवा कर
दिया पलट के सूरज हो चला है
दिन को जीने का हौंसला दे रहा है
रात के आने का न्योता लिख रहा है
ये
सिलसिला यहाँ रोज़ चला है
नीरव
शांतता के दिए में
फड़फड़ा के जी रहा है
घनी रात का...डर
उजालों की नोक पर
तप तप के उधार की सांसें...बटोर,
आनेवाले कल की चिंता से....लहू लुहान,
रात के घाव...सी रहा है
सवेरे,
इस खेल से उठते धुंवे को हवा कर
दिया पलट के सूरज हो चला है
दिन को जीने का हौंसला दे रहा है
रात के आने का न्योता लिख रहा है
ये
सिलसिला यहाँ रोज़ चला है
नीरव
No comments:
Post a Comment