फिलोसोफिकल डस्टबिन के लिए एक कविता!
क्या जानते हो तुम
मेरे नाम के अलावा
मेरे बारे में?
ये सच है के हम रोज़ मिलते है
साथ जीते है
साथ मरने की कस्मे कहतें हैं
एक दिन
मर भी जातें हैं
याद बनके फोटो में उम्र भर जी जातें हैं
नाम ही तो रह जातें है
पर नाम सिर्फ एक ध्वनि है
एक गूंज है
जिसके लेते ही
एक अपनेपन का एहसास जीवित हो उठता है
सूखा भी हरा होने लगता है
परिवार बाग़बान बन पनपने लगता हैं
मेले ही मेले सजने लगते है
और जीवन कारोबार चल पड़ता है
बच्चा नाम की तख्ती ले कर समाज में शामिल हो जाता है
नाम काम और जीने का जाम...ये नशा सभी को लग जाता है!
नाम से मूर्तियां भी सांसें लेने लगती है
नामी लोग भगवान का मकसद पैदा करते हैं,
भगवान को दुनिया चलाने का अर्थ मिल जाता है
मेरी तुम्हारी पहचान बन जाती है
हम एक दूसरे के हो जाते हैं
एक दूसरे में खोकर एक दूजे को पहचानने के खेल में
खिलाडी, निर्णायक, और निर्णय हम खुद ही बन जातें हैं
और
अक्सर....जीत जातें हैं
इस्सलिये अंत तक
अनजाने में जान से...चले जाते हैं
पर
जान नहीं पाते,
(कि)
ये नाटक हम क्यों रोज़ houseful चलाय जातें हैं!
जो जान गए थे
वो गिरते पत्ते के टूटन में ही जीवन का मर्म जान गए थे
नाम,काम,अर्थ से दूर चले गए थे
इसीलिए
तेरे मेरे जैसो को इस खेल में खेलने
"उजाला"छोड़ गए थे!
और
इस उजाले में खुद को ढूंढने की बजाय
हमने
अपने नाम की तख्तीयों को चमकाने की जद्दोजेहद शुरू कर दी!
वो पत्त्ता जो बुद्ध ने टूटते हुवे देखा था
आज भी तेरी मेरी रूह की डालियों से
टूट के उड़ रहा है
मोक्ष हासिल करने
अपनी धरती ढूंढ रहा है
मौसम के बहाने आ आकर
गिर रहा है..
क्या तुम्हे पता है?
तेरे मेरे नाम के अलावा
इस जीवन में
और भी कई...मकाम है
पहचान सिर्फ एक बड़ा स्टेशन है
रिश्ते, नातों की राहों के बहुत आगे भी
कई सुबह शाम के ब्रहम्मांड है
नीरव वैद्य
क्या जानते हो तुम
मेरे नाम के अलावा
मेरे बारे में?
ये सच है के हम रोज़ मिलते है
साथ जीते है
साथ मरने की कस्मे कहतें हैं
एक दिन
मर भी जातें हैं
याद बनके फोटो में उम्र भर जी जातें हैं
नाम ही तो रह जातें है
पर नाम सिर्फ एक ध्वनि है
एक गूंज है
जिसके लेते ही
एक अपनेपन का एहसास जीवित हो उठता है
सूखा भी हरा होने लगता है
परिवार बाग़बान बन पनपने लगता हैं
मेले ही मेले सजने लगते है
और जीवन कारोबार चल पड़ता है
बच्चा नाम की तख्ती ले कर समाज में शामिल हो जाता है
नाम काम और जीने का जाम...ये नशा सभी को लग जाता है!
नाम से मूर्तियां भी सांसें लेने लगती है
नामी लोग भगवान का मकसद पैदा करते हैं,
भगवान को दुनिया चलाने का अर्थ मिल जाता है
मेरी तुम्हारी पहचान बन जाती है
हम एक दूसरे के हो जाते हैं
एक दूसरे में खोकर एक दूजे को पहचानने के खेल में
खिलाडी, निर्णायक, और निर्णय हम खुद ही बन जातें हैं
और
अक्सर....जीत जातें हैं
इस्सलिये अंत तक
अनजाने में जान से...चले जाते हैं
पर
जान नहीं पाते,
(कि)
ये नाटक हम क्यों रोज़ houseful चलाय जातें हैं!
जो जान गए थे
वो गिरते पत्ते के टूटन में ही जीवन का मर्म जान गए थे
नाम,काम,अर्थ से दूर चले गए थे
इसीलिए
तेरे मेरे जैसो को इस खेल में खेलने
"उजाला"छोड़ गए थे!
और
इस उजाले में खुद को ढूंढने की बजाय
हमने
अपने नाम की तख्तीयों को चमकाने की जद्दोजेहद शुरू कर दी!
वो पत्त्ता जो बुद्ध ने टूटते हुवे देखा था
आज भी तेरी मेरी रूह की डालियों से
टूट के उड़ रहा है
मोक्ष हासिल करने
अपनी धरती ढूंढ रहा है
मौसम के बहाने आ आकर
गिर रहा है..
क्या तुम्हे पता है?
तेरे मेरे नाम के अलावा
इस जीवन में
और भी कई...मकाम है
पहचान सिर्फ एक बड़ा स्टेशन है
रिश्ते, नातों की राहों के बहुत आगे भी
कई सुबह शाम के ब्रहम्मांड है
नीरव वैद्य
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