चाँद के तले जागी,आनेवाले कल की चिंता
कल का सूरज
आ गिरा है बनके रोटी का टुकड़ा
मेरी थाली में
मुझको ताक रहा है ?
या
मेरी भूख को भांप रहा है?
सदियों का यात्री
मानवीय महत्वाकांक्षाओं के वार से घायल
क्या अपना पौरुष समर्पित करने तो नहीं आ पड़ा??
उसने भी शायद सुना हो
के चाँद और मार्स के बाद
अब हमारी प्रजाति उसके प्रांगण तक पोहोंचने के ख्वाब सजा बैठी है
या फिर,
रोटी का लालच दे
वो
हमे मनाने आया है?
ये प्रगति है?
या
दुर्गति?
जो भी है
चाँद, तारे, समस्त ब्रहम्मांड सारे है परेशान
अगर एक आदमी सूरज को खा गया
तो
कल का आसमां, बन जाएगा ...समशान!
आनेवाला कल,
इस चिंता की खूँटी पर चाँद को टांग...
रात भर जाग रहा है!
नीरव
कल का सूरज
आ गिरा है बनके रोटी का टुकड़ा
मेरी थाली में
मुझको ताक रहा है ?
या
मेरी भूख को भांप रहा है?
सदियों का यात्री
मानवीय महत्वाकांक्षाओं के वार से घायल
क्या अपना पौरुष समर्पित करने तो नहीं आ पड़ा??
उसने भी शायद सुना हो
के चाँद और मार्स के बाद
अब हमारी प्रजाति उसके प्रांगण तक पोहोंचने के ख्वाब सजा बैठी है
या फिर,
रोटी का लालच दे
वो
हमे मनाने आया है?
ये प्रगति है?
या
दुर्गति?
जो भी है
चाँद, तारे, समस्त ब्रहम्मांड सारे है परेशान
अगर एक आदमी सूरज को खा गया
तो
कल का आसमां, बन जाएगा ...समशान!
आनेवाला कल,
इस चिंता की खूँटी पर चाँद को टांग...
रात भर जाग रहा है!
नीरव
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